कुछ ऐसा ही हौसला प्रगतिशील बागबान हरिमन शर्मा (Hariman Sharma) में था, जिन्होंने वह काम कर दिखाया, जो कृषि वैज्ञानिकों के लिए भी मुश्किल था. सेब की खेती हमेशा ठंडे प्रदेशों में ही की जाती है, लेकिन हरिमन शर्मा ने 46-47 डिगरी तापमान वाले इलाकों में भी सेब का उत्पादन कर अपनी काबिलीयत को दिखाया.
बात तो बहुत पुरानी है, लेकिन जिक्र करना भी जरूरी है. साल 1999-2000 तक किसी ने भी यह नहीं सोचा था कि बर्फीली पहाडि़यों पर तैयार होने वाला फल सेब निचले हिमाचल प्रदेश, जहां का तापमान 40 डिगरी से 46 डिगरी हो, में भी सफलतापूर्वक तैयार हो सकता है.
हिमाचल प्रदेश सरकार ने निचले हिमाचल प्रदेश में सेब की खेती के लिए साल 1965 में जिला सिरमौर में नाहन के पास बागथन में अनुसंधान केंद्र खोला था, जिस में प्रदेश के गरम इलाकों में सेब की बागबानी को सफल बनाने के लिए शोध किया जाना था. करोड़ों रुपए खर्च करने और 10 साल के बाद भी कोई खास नतीजा नहीं निकला, तो सरकार ने साल 1975 में यह प्रोजैक्ट बंद कर दिया था.
इसी दिशा में काम करते हुए प्रगतिशील किसान हरिमन शर्मा ने ठंडे इलाके में पैदा होने वाले सेब को हिमाचल प्रदेश के ऐसे इलाके में भी पैदा कर दिखाया, जहां का तापमान 40 से 46 डिगरी सेंटीग्रेड होता है.
हरिमन शर्मा की सफलता को देखते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अमरतारा, शिमला द्वारा इस सेब की वैरायटी को हिमाचल प्रदेश के निचले गरम क्षेत्र के लिए भी अनुमोदित किया गया है.
हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में पनियाला गांव के प्रगतिशील बागबान हरिमन शर्मा ने बताया कि साल 2014 में गरम क्षेत्रों के लिए सेब की एचआरएमएन 99 प्रजाति तैयार की गई है. उन के द्वारा विकसित सेब की इस प्रजाति पर नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन, अहमदाबाद, गुजरात के वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने भी शोध किया है, जिन्होंने इसे कसौटी पर खरा पाया है.
साल 2014-15 में दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में इस वैरायटी के 50 पौधे लगाए गए थे. अनेक अनुसंधान केंद्रों व उद्यान विभाग हिमाचल प्रदेश में भी 6000 पौधे रोपे गए हैं. इस के अलावा गैरसरकारी संस्थाओं को 5000 पौधे व पूरे देश के 29 राज्यों में हजारों पौधे रोपित कराए गए हैं.
परंपरागत क्षेत्र का सेब जुलाई से सितंबर तक तैयार होता है, मगर गरम इलाके का एचआरएमएन 99 प्रजाति का सेब जून में तैयार हो जाता है. उस समय बाजार में सेब की कमी भी होती है, जिस कारण इस सेब का बहुत अच्छा दाम भी मिल जाता है.
हरिमन शर्मा को अनेक पुरस्कार मिले हैं, जिन में राष्ट्रपति द्वारा दिया गया ‘एनआईएफ पुरस्कार’ भी शामिल है.
ऐसे जनमी प्रजाति
इस वैरायटी के ईजाद होने की कहानी भी काफी दिलचस्प है. हरिमन शर्मा ने बताते हैं कि घर में खाने के लिए लाए गए सेब के बीज से एक पौधा तैयार किया, जिस में कुछ सालों बाद फल भी आए, लेकिन वे काफी छोटे थे. लेकिन वे यह देख कर हैरान थे कि क्या बिलासपुर जैसी गरम जगह पर भी सेब उग सकता है. दिलचस्पी बढ़ने के बाद हरिमन शर्मा ने इस पौधे की कलम को किन्नौरी प्लम की एक किस्म पर ग्राफ्ट कर दिया. नतीजा यह निकला कि फल का आकार बड़ा हो गया और रंग व स्वाद भी बेहतर हो गया. इस के बाद उन्हें अपने काम में सफलता मिलती चली गई.
हरिमन को मिले पुरस्कार
* राज्यस्तरीय उत्कृष्ट कृषक पुरस्कार 15 अगस्त 2008. * प्रेरणास्रोत सम्मान पुरस्कार 15 अगस्त 2009. * सर्वश्रेष्ठ हिमाचली किसान खिताब 2010. * मंडलस्तरीय व जिलास्तरीय उत्कृष्ट पुरस्कार 2007-08. * कृषि पंडित अवार्ड. * ऊना में सफल सेब उत्पादन सम्मान 2011. * महामहिम राज्यपाल हिमाचल प्रदेश सेब उत्पादन के लिए सम्मान 3 फरवरी 2016. * राष्ट्रीय नवोन्मेषी कृषक सम्मान 21 मार्च 2016. * भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली द्वारा कृषक अध्येता पुरस्कार 2017.